असम के रामई गांव का एक 17 माह का बच्चा जयंत तीखी मिर्च भी ऐसे खा जाता है जैसे चॉकलेट। इतना ही नहीं वन बिना किसी परेशानी के इसे आसानी से चबा जाता है। यह मजेदार समाचार यहां है।
परफ्यूम लगाने पर अदालत में घसीटा
डेट्रॉयट की एक महिला ने अपने साथ काम करने वालों को सिर्फ इसलिए कोर्ट में घसीट लिया, क्योंकि उनके परफ्यूम की खुशबू उसके लिए असहनीय है। समाचार यहां है।
बीच की राह पर सधे कदमों से
कल हमने अपने पोस्ट मे मार्क टली द्वारा भारत और भारतीयता पर लिखित एक बहुत अच्छे लेख के पहले भाग के बारे में बताया था। आज हम दूसरे भाग के बारे में बता रहे हैं।
’मध्यमार्ग पर चलने के लिए यह जरूरी होता है किसी धुन या मोह से बचा जाए। चूंकि भारत पर इफिशंसी की धुन सवार नहीं हुई है, इसलिए यह कई बार इतना अक्षम दिखाई देने लगता है, जितना कि असल में है नहीं। साल 1965 की तुलना में तो यह बहुत सक्षम हो चुका है, जब मैं पहली-पहली बार यहां आया था। उस वक्त अगर आपको ट्रेन का रिटर्न टिकट चाहिए होता था, तो यात्रा पर निकलने से पहले गंतव्य स्टेशन के स्टेशन मास्टर को इसका अनुरोध करते हुए एक टेलीग्राम भेजना पड़ता था। कोई जरूरी नहीं था कि वह आपका टिकट कन्फर्म करते हुए जवाब दे ही। वह जवाब दे भी सकता था और नहीं भी। लेकिन आज आप इंटरनेट पर कहीं से कहीं के लिए टिकट खरीद सकते हैं”
इस पूरे लेख को आप यहां पढ़ सकते हैं।
परफ्यूम लगाने पर अदालत में घसीटा
डेट्रॉयट की एक महिला ने अपने साथ काम करने वालों को सिर्फ इसलिए कोर्ट में घसीट लिया, क्योंकि उनके परफ्यूम की खुशबू उसके लिए असहनीय है। समाचार यहां है।
बीच की राह पर सधे कदमों से
कल हमने अपने पोस्ट मे मार्क टली द्वारा भारत और भारतीयता पर लिखित एक बहुत अच्छे लेख के पहले भाग के बारे में बताया था। आज हम दूसरे भाग के बारे में बता रहे हैं।
’मध्यमार्ग पर चलने के लिए यह जरूरी होता है किसी धुन या मोह से बचा जाए। चूंकि भारत पर इफिशंसी की धुन सवार नहीं हुई है, इसलिए यह कई बार इतना अक्षम दिखाई देने लगता है, जितना कि असल में है नहीं। साल 1965 की तुलना में तो यह बहुत सक्षम हो चुका है, जब मैं पहली-पहली बार यहां आया था। उस वक्त अगर आपको ट्रेन का रिटर्न टिकट चाहिए होता था, तो यात्रा पर निकलने से पहले गंतव्य स्टेशन के स्टेशन मास्टर को इसका अनुरोध करते हुए एक टेलीग्राम भेजना पड़ता था। कोई जरूरी नहीं था कि वह आपका टिकट कन्फर्म करते हुए जवाब दे ही। वह जवाब दे भी सकता था और नहीं भी। लेकिन आज आप इंटरनेट पर कहीं से कहीं के लिए टिकट खरीद सकते हैं”
इस पूरे लेख को आप यहां पढ़ सकते हैं।
और अंत में





1 comments:
sahi!!!!! Jayant ke baare mein padh kar maza aa gaya.
Post a Comment